कश्मीर शैव दर्शन · हिन्दी सम्पूर्ण भाष्य

विज्ञान
भैरव तन्त्र

शिव-पार्वती संवाद · 112 ध्यान-धारणाएँ · 163 श्लोकों का word-by-word अध्ययन — और हर अध्याय में वास्तु से सम्बन्ध।

15 अध्याय
112 धारणाएँ
163 श्लोक
292+ मिनट
विज्ञान भैरव तन्त्र · हिन्दी guide cover
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यत्किञ्चित्सकलं रूपं भैरवस्य प्रकीर्तितम् ।
तदसारतया देवि विज्ञेयं शक्रजालवत् ॥

श्लोक 6 · पूरी पुस्तक का बीज

"भैरव का जो भी साकार रूप वर्णित है — उसे असार जानना चाहिए, इन्द्रजाल की तरह।"

यह श्रृंखला क्या है

एक संवाद जो आज भी जारी है।

विज्ञान भैरव तन्त्र कश्मीर शैव परम्परा का सबसे संक्षिप्त और गहरा ग्रन्थ है। 163 श्लोकों में देवी पार्वती परम तत्त्व का स्वरूप पूछती हैं, और भगवान शिव 112 छोटी-छोटी ध्यान-धारणाएँ बताते हैं — हर एक एक-दो वाक्य की, पर अपने आप में पूरी साधना।

श्वास से लेकर शून्य तक, मन्त्र से लेकर मौन तक, इन्द्रिय-भोग से लेकर आत्म-पहचान तक — हर द्वार से शिव साधक को परम तक ले जाते हैं।

हर अध्याय में — Sanskrit श्लोक, पद-विभाजन, अर्थ, भावार्थ, स्पष्ट चित्र, और वास्तु से सम्बन्ध। क्योंकि "भीतर का घर" (चेतना) और "बाहर का घर" (भवन) — दोनों एक ही शिव-शक्ति संवाद से उत्पन्न हुए हैं।

सम्पूर्ण श्रृंखला

सभी 15 अध्याय

क्रम से पढ़िए — या जिस विषय पर पुकार सुनें, वहीं उतरिए।

01 अध्याय 1 — शिव-पार्वती का प्रथम संवाद
अध्याय 1

शिव-पार्वती का प्रथम संवाद

The Opening Dialogue

श्लोक 1-6 — रुद्र-यामल, त्रिक, शक्रजाल

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02 अध्याय 2 — देवी का अधीर प्रश्न
अध्याय 2

देवी का अधीर प्रश्न

The Devi's Probing

श्लोक 7-22 — साधक क्या करे? "नातिविस्तीर्णम्"

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03 अध्याय 3 — भैरव का असली स्वरूप
अध्याय 3

भैरव का असली स्वरूप

The True Nature of Bhairava

श्लोक 23-32 — प्राण-अपान, श्वास के दो ठहराव

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04 अध्याय 4 — श्वास का विज्ञान
अध्याय 4

श्वास का विज्ञान

The Science of Breath

धारणा 1-15 — द्वादशान्त, हंस, सोऽहम्, कुम्भक

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05 अध्याय 5 — शरीर का मण्डल
अध्याय 5

शरीर का मण्डल

The Mandala of the Body

धारणा 16-35 — चक्र, कुण्डलिनी, अंग-ध्यान

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06 अध्याय 6 — शून्य का विज्ञान
अध्याय 6

शून्य का विज्ञान

The Science of Void

धारणा 36-55 — आकाश, प्रकाश, अन्धकार, अनन्त

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07 अध्याय 7 — ध्वनि का रहस्य
अध्याय 7

ध्वनि का रहस्य

The Secret of Sound

धारणा 56-75 — ओम्, मन्त्र, नाद, मौन

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08 अध्याय 8 — इन्द्रियों का योग
अध्याय 8

इन्द्रियों का योग

The Yoga of the Senses

धारणा 76-95 — रूप, रस, गन्ध, स्पर्श, भाव

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09 अध्याय 9 — "मैं" का अन्वेषण
अध्याय 9

"मैं" का अन्वेषण

The Inquiry of "I"

धारणा 96-112 — आत्म-पहचान, शिवोऽहम्

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10 अध्याय 10 — देवी की पहचान
अध्याय 10

देवी की पहचान

The Devi's Recognition

श्लोक 139-163 — संवाद का समापन

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11 अध्याय 11 — तन्त्र शास्त्र का परिचय
अध्याय 11

तन्त्र शास्त्र का परिचय

Introduction to Tantra

चार यामल · शास्त्र-श्रेणी · तन्त्र की क्रान्ति

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12 अध्याय 12 — तीन दर्शनों की तुलना
अध्याय 12

तीन दर्शनों की तुलना

Comparing Three Schools

सांख्य · वेदान्त · तन्त्र — एक तुलनात्मक यात्रा

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13 अध्याय 13 — तन्त्र की 108 शिक्षाएँ
अध्याय 13

तन्त्र की 108 शिक्षाएँ

108 Tantra Teachings

रत्न-कोश — 108 सूत्र · 108 दिन की यात्रा

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14 अध्याय 14 — गुरु · दीक्षा · मन्त्र
अध्याय 14

गुरु · दीक्षा · मन्त्र

Guru, Diksha, Mantra

गुरु-शिष्य त्रिक · 11 दीक्षाएँ · मन्त्र-चैतन्य

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15 अध्याय 15 — सूक्ष्म शरीर का विज्ञान
अध्याय 15

सूक्ष्म शरीर का विज्ञान

The Subtle Body

3.5 करोड़ नाड़ी · 7 चक्र · 3 ग्रन्थी · कुण्डलिनी

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तीन रास्ते

आप कौन से रास्ते से चलेंगे?

हर पाठक के लिए अलग प्रवेश-द्वार।

पारम्परिक

पूरा संवाद, क्रम से

  • अध्याय 1 से 10 — सीधा
  • हर शनिवार एक अध्याय
  • 10 सप्ताह में पूर्ण
अध्याय 1 से

साधक

सीधे धारणाओं पर

  • श्वास से शुरू (अध्याय 4)
  • शरीर → शून्य → ध्वनि
  • आत्म-पहचान पर समापन
अध्याय 4 से

वास्तु-प्रेमी

घर और चेतना का मेल

  • पहले शून्य (अध्याय 6)
  • फिर शरीर का मण्डल (5)
  • अन्त में संवाद की जड़ (1)
अध्याय 6 से

"धन्योऽहं कृतकृत्यास्मि सम्पूर्णाहं महेश्वर ।
इदानीं ज्ञातमेवेदं भैरवस्य परं पदम् ॥"

— देवी पार्वती · अन्तिम वाक्य · श्लोक 156

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