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स्पन्दन अध्याय 14 — BEM ग्रिड पर स्थापत्य योजना

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VastuGuruji Team 21 Jun 2026

स्पन्दन अध्याय 14 — BEM ग्रिड पर स्थापत्य योजना

अध्याय चौदह

वैदिक मण्डल और आधुनिक भू-चुम्बकीय ग्रिड — एक संगम

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BEM ग्रिड — मुख्य · प्रधान · सामान्य · सहायक केन्द्र ब्रह्म मुख्य (मोटी) · प्रधान (मध्यम) · सामान्य · सहायक (बारीक)
चार स्तरों का ग्रिड — एक ही मण्डल पर

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"वास्तु शास्त्र के ग्रन्थ नगर-योजना के मूलभूत सिद्धान्तों, स्थापत्य के तत्त्वों और भवन निर्माण-कार्यों के विस्तृत वर्णन प्रस्तुत करते हैं।"

वास्तु शास्त्र पर ग्रन्थ नगर-योजना के मूलभूत सिद्धान्तों, स्थापत्य के तत्त्वों और भवन-निर्माण कार्यों के विस्तृत वर्णन प्रस्तुत करते हैं। चार प्रकार के ग्रिड हैं — मुख्य, प्रधान, सामान्य और सहायक। तीनों परस्पर सम्बन्धित हैं। योजना और निष्पादन में मार्गदर्शन देते हैं।

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पुर — किलेबन्द नगर

एक प्रकार का सुरक्षित स्थापत्य रामपार्ट से घेरा हुआ — खुले इलाक़े का चयन, नगर-निर्माण की रचना और संरचना सिद्धान्त। तमिलनाडु में जिंजी का क़िला इन सिद्धान्तों का सबसे उत्कृष्ट उदाहरण है। बहु-स्तरीय ज़मीनी कार्य — सुरक्षा बढ़ाने के लिए कई स्तर। पाँच पहाड़ियों पर बना सुदृढ़ क़िला नगर।

जिंजी की एक खासियत — स्तरों के बीच भू-गर्भीय सुरंगें। केन्द्र में राजगिरि पहाड़ी। कलासतम्भ — सोलह सतह — समतलीकरण के बीच विशिष्ट स्थापत्य। शाही महल, बाजार, मन्दिर, स्नानघर, अस्तबल और तहख़ाने।

नायक मण्डपम् — चोकर के तरीक़े से बनाया। अन्न भण्डार 1 80 हस्त × 40 हस्त × 30 हस्त। पाँच फुट के पत्थर बैरिकेड बहुत मज़बूत हैं। यह क़िला 13वीं शताब्दी में सेम्बियन कुलनतई के विजयनगर शासन के तहत बनाया गया।

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मुख्य ग्रिड — Major Grid

यह नगर-योजना से सम्बन्धित है। इस ग्रिड के सहारे ही नगर का बुनियादी ढाँचा, नगर-सीमा और प्रशासनिक क्षेत्र निर्धारित होते हैं। मुख्य ग्रिड पूर्व-पश्चिम और उत्तर-दक्षिण रेखाओं पर आधारित होता है, जो दिशा-निर्धारक स्तम्भों या नींव से अंकित होते हैं।

यह 1 पद, 4 पद, 9 पद, 16 पद, 25 पद, या 64 पद आधार में हो सकता है। "पद" शब्द एक मॉड्यूल को इंगित करता है। पाद-विन्यास — पदों का बिछौना — मण्डल का आधारभूत ढाँचा है।

तमिलनाडु के नगरों में देखा जा सकता है। कांची, मदुरै, चिदम्बरम — पाद-विन्यास नगर-योजना के उदाहरण। केन्द्र में मन्दिर। चार दिशाओं में सड़कें। हर सड़क का अनुपात मॉड्यूल पर आधारित।

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प्रधान ग्रिड — Principal Grid

नगर के भीतर — एक स्थापत्य परिसर के लिए। मन्दिर परिसर, राज-महल, या अन्य महत्त्वपूर्ण भवन-समूह। केन्द्रीय अक्ष से शुरू होकर परिसर के मुख्य भवनों का विन्यास निर्धारित करता है।

मायामत और मानसार में प्रधान ग्रिड के लिए तीन मण्डलों का उल्लेख — स्थण्डिल (49 पद), मण्डूक (64 पद), परमशायिक (81 पद)। मण्डूक मण्डल — मेंढक की मुद्रा — सबसे लोकप्रिय। केन्द्र के 4 × 4 = 16 पद ब्रह्मा के, अगले 32 पद देवताओं के और बाहरी 16 पद पैशाचिक प्रहरियों के।

परमशायिक — 9 × 9 = 81 पद — सर्वोच्च योगी की शयन-मुद्रा। केन्द्र में नौ पद ब्रह्मा के, चार दिशाओं के मुख्य देवता, और बाहरी पंक्ति में 32 देवता। यह मण्डल मन्दिर-योजना और राज-महल दोनों के लिए उपयुक्त।

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सामान्य ग्रिड — Normal Grid

एक भवन के स्तर पर। एकल भवन की योजना — चाहे वह घर हो, मन्दिर हो या सभा-स्थल। प्रधान ग्रिड का एक छोटा भाग जो भवन की चार दीवारों और आन्तरिक विभाजनों को नियन्त्रित करता है।

सामान्य ग्रिड का आधार हस्त है। एक हस्त = 24 अङ्गुल = लगभग 18 इंच। भवन की लम्बाई और चौड़ाई के अनुपात हस्त-गुणकों में निर्धारित। दरवाज़े की चौड़ाई, ऊँचाई — सब अङ्गुल-इकाई पर।

शान्तिक भवन — चौड़ाई : ऊँचाई = 1 : 1
पौष्टिक भवन — 1 : 1.25
जयद भवन — 1 : 1.5
धनद भवन — 1 : 1.75
अद्भुत भवन — 1 : 2

इन अनुपातों में हर एक का सीधा सम्बन्ध भवन के स्वभाव से है — शान्तिक शान्ति देता है, पौष्टिक स्वास्थ्य, जयद विजय, धनद धन और अद्भुत यश।

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सहायक ग्रिड — Subsidiary Grid

विवरण के स्तर पर। भवन की दीवार-मोटाई, कोलम-व्यास, बीम-ऊँचाई, खिड़की-स्थान, सीढ़ी-चौड़ाई। मानसार में कोलम के पाँच मानक अनुपात — ब्रह्म-कान्त (वर्गाकार), विष्णु-कान्त (अष्टकोण), रुद्र-कान्त (षोडशकोण), शिव-कान्त (बत्तीस कोण), स्कन्द-कान्त (वृत्तीय)

सहायक ग्रिड का आधार यव — 1 अङ्गुल = 8 यव। यव से छोटी इकाइयाँ — मूँग, रत्ती, माषक — गहनों या मूर्ति-निर्माण के लिए।

मूर्ति-निर्माण में ताल मान — सिर की ऊँचाई से शरीर-अंगों का अनुपात। दश-ताल मूर्ति — सबसे प्रचलित। हाथ-पैर, चेहरे का हर हिस्सा यव-गुणकों में।

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चार ग्रिड का सम्बन्ध

चारों ग्रिड परस्पर सम्बद्ध हैं। मुख्य ग्रिड से प्रधान ग्रिड निकलता है। प्रधान से सामान्य, और सामान्य से सहायक। हर स्तर पिछले स्तर का एक अंश है।

उदाहरण — कांची नगर का मुख्य ग्रिड पाद-विन्यास। उसके भीतर एकम्बरनाथ मन्दिर परिसर का प्रधान ग्रिड परमशायिक मण्डल। मन्दिर के गर्भगृह का सामान्य ग्रिड एक छोटा भाग। और गर्भगृह के स्तम्भों का सहायक ग्रिड शिव-कान्त।

यह संरचना — स्थूल से सूक्ष्म तक — हर स्तर पर अनुपातिक एकता बनाए रखती है। शास्त्रों के अनुसार, यदि एक स्तर पर अनुपात बिगड़ता है, तो पूरा भवन उस दोष को धारण करता है।

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आधुनिक BEM ग्रिड

आधुनिक स्थापत्य में — विशेष रूप से बड़े पैमाने पर शहरी-नियोजन में — एक तकनीकी ग्रिड पद्धति आई — BEM (Building Element Model)। मुख्य-प्रधान-सामान्य-सहायक — ये चारों स्तर BEM के Block-Element-Modifier स्तर के समान।

BIM (Building Information Modeling) में भी यही अवधारणा — हर वस्तु अपने पैरेण्ट के अनुपात में बँधी। नगर-योजना से लेकर एक खूँटी तक — सब कुछ एक ही मेट्रिक प्रणाली पर।

लेकिन वास्तु शास्त्र का BEM-समान ग्रिड एक हज़ार वर्ष से अधिक पुराना है। मायामत 11वीं शताब्दी का, मानसार 7वीं शताब्दी का। आधुनिक तकनीक केवल पुराने सिद्धान्तों का डिजिटल अवतार है।

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ग्रिड-दोष — और उनके प्रभाव

शास्त्र चेतावनी देते हैं — यदि भवन ग्रिड-रेखा पर बना है, तो विशेष दोष उत्पन्न होते हैं। वेध — कोई बीम या स्तम्भ ग्रिड-रेखा को काटता है। शल्य — ज़मीन के नीचे कोई पुरानी हड्डी, धातु या लकड़ी। मर्म — ग्रिड-रेखाओं के सन्धि-बिन्दु।

मानसार के अनुसार —
9 पद × 9 पद = 81 पद मण्डल में —
4 कोनों पर 4 मर्म (अग्नि, यम, निऋति, ईशान) — दूसरे स्तर के।
4 दिशाओं के मध्य में 4 मर्म (इन्द्र, सोम, वरुण, कुबेर) — पहले स्तर के।
केन्द्र में 1 मर्म ब्रह्मा का — सर्वोच्च।

इन नौ मर्म-बिन्दुओं पर भार रखना — विशेषकर शौचालय या भारी मशीन — महा-दोष माना जाता है। आज के Hartmann और Curry ग्रिड-शोध इन्हीं प्राचीन मर्म-बिन्दुओं को भू-चुम्बकीय रूप से सिद्ध करते हैं।

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ग्रिड और पञ्च तत्त्व

हर ग्रिड-दिशा एक तत्त्व से जुड़ी है। उत्तर — जल, पूर्व — अग्नि, दक्षिण — पृथ्वी, पश्चिम — वायु, केन्द्र — आकाश। ग्रिड पर कमरे का स्थान — उसके तत्त्व-स्वभाव के अनुसार।

NE — ईशान — पूजा कक्ष (आकाश + जल)
SE — आग्नेय — रसोई (अग्नि)
SW — नैऋत्य — मालिक का शयन (पृथ्वी)
NW — वायव्य — अतिथि / भण्डार (वायु)
केन्द्र — ब्रह्मस्थान — खुला आँगन (आकाश)

यह योजना केवल धार्मिक नहीं — व्यावहारिक भी है। पूर्व में सूर्य उगता है — पूजा वहीं उपयुक्त। SE में सुबह की धूप — रसोई की आग को सहायक। SW छाया और स्थिरता — विश्राम के लिए। NW हवादार — अतिथि और सामान।

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पाद-विन्यास के व्यावहारिक नियम

1. भूखण्ड के बाहरी कोनों को पाद-रेखा से बाँधो। चार दिशाओं की मूल अक्ष-रेखाएँ खींचो। यह मुख्य ग्रिड।

2. चुने हुए मण्डल (49/64/81) के अनुसार आन्तरिक पद-विभाजन करो। यह प्रधान ग्रिड।

3. हर कमरे को उसके तत्त्व-दिशा में रखो। दीवार ग्रिड-रेखा पर नहीं — पद-केन्द्र पर। यह सामान्य ग्रिड।

4. स्तम्भ, बीम और छत-तत्त्व — अङ्गुल-गुणकों में। यह सहायक ग्रिड।

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"BEM ग्रिड एक ज्यामितीय अनुशासन है। पर इसके पीछे — दर्शन। हर रेखा एक तत्त्व, हर पद एक देवता, हर मर्म एक ऊर्जा-केन्द्र। यह केवल नक्शा नहीं — यह सृष्टि का आरेख है।"

॥ इति शुभम् ॥

अगले अध्याय में — ऊर्जा-ग्रिड और स्वस्थ निवास। Hartmann और Curry ग्रिड, मानवीय ऊर्जा-अक्ष और स्वास्थ्य पर प्रभाव।

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