काली तन्त्र शास्त्र

काली तन्त्र शास्त्र अध्याय 4 — काली यन्त्र विज्ञान

~4 मिनट पढ़ें
राणा सिकंदर सिंह 20 Jun 2026

English version will be published soon. Showing Hindi content for now.

काली तन्त्र शास्त्र अध्याय 4 — काली यन्त्र विज्ञान

अध्याय चार

पन्द्रह कोण · आठ कमल · चार द्वार · एक बिन्दु

क्रीं द्वार (उत्तर) द्वार (दक्षिण) भूपुर (रक्षा-वलय) अष्ट दल कमल 15 कोण (शिव-शक्ति) बिन्दु (काली)
पूर्ण काली यन्त्र — चार परतों में पूरा ब्रह्माण्ड

❖ ❖ ❖

"यन्त्र देवी का शरीर है।
उसे बनाना — देवी को आमन्त्रित करना है।"

यन्त्र शब्द संस्कृत के "यम्" + "त्र" से बना — "नियन्त्रण करने वाला"। यन्त्र वह रचना है जो देवता की शक्ति को एक स्थान पर बाँधती है। मूर्ति देवता का "शरीर" है, यन्त्र देवता का "ज्यामिति शरीर"।

तन्त्र में मूर्ति-पूजा से अधिक महत्व यन्त्र-पूजा का है। क्यों? क्योंकि यन्त्र निर्मल है, सूक्ष्म है, और साधक की पात्रता के अनुसार खुलता है। एक ही यन्त्र हज़ार साधक देखें — हर एक को अलग दर्शन देगा।

· · ·

श्लोक एक

यन्त्र की चार परतें

चतुर्द्वार-पुटे भूपं अष्ट-पत्र-दलं ततः ।
पञ्चदश-कोणं मध्ये बिन्दुर्भैरव-कालिकम् ॥

अर्थ

"चार द्वारों वाला भूपुर, उसके भीतर अष्ट-पत्र (आठ पंखुड़ी) कमल, फिर पन्द्रह कोण, और मध्य में बिन्दु — भैरव-कालिका का स्थान।"

परत-दर-परत समझ

परत 1 — भूपुर (बाहरी वर्ग): चार दिशाओं में चार द्वार। यह यन्त्र की "रक्षा-दीवार"। साधक यहाँ से प्रवेश करता है।

परत 2 — अष्ट-दल कमल: आठ पंखुड़ियाँ — आठ दिशा-देवियाँ। पूर्व में इन्द्राणी, आग्नेय में अग्नायी, दक्षिण में याम्या, आदि।

परत 3 — पन्द्रह कोण: पाँच त्रिकोण (तीन शक्ति + दो शिव) मिलकर बनाते हैं 15 बिन्दु। यह "सृष्टि-स्थिति-संहार" का ज्यामिति रूप।

परत 4 — केन्द्र बिन्दु: सब के बीच एक बिन्दु। यहीं काली बैठती हैं। यहीं "क्रीं" लिखा जाता है।

· · ·

यन्त्र निर्माण की विधि

1. सामग्री: ताम्र-पत्र, चाँदी-पत्र, या भोजपत्र। अष्टगन्ध (आठ सुगन्धित द्रव्य)। केसर। चन्दन।

2. समय: शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी या अमावस्या। रात के 12 बजे — काली का प्रहर।

3. क्रम:

पहले बिन्दु बनाइए — यन्त्र का केन्द्र। फिर 15 कोण। फिर 8 पंखुड़ी। फिर भूपुर। यह क्रम उल्टा है — अंदर से बाहर। ब्रह्माण्ड भी ऐसे ही बना — पहले बिन्दु, फिर विस्तार।

4. मन्त्र-न्यास: हर रेखा बनाते समय "क्रीं" का जप। हर कोण पर एक देवी का नाम।

5. प्राण-प्रतिष्ठा: यन्त्र पूरा होने के बाद, उसमें "प्राण" स्थापित किया जाता है। यह विशेष मन्त्र-प्रक्रिया है — गुरु से सीखें।

· · ·

यन्त्र पूजा की विधि

दैनिक पूजा:

• रोज़ सुबह स्नान करके यन्त्र के सामने बैठें।

• पहले प्रणाम।

• फिर लाल पुष्प चढ़ाएँ।

• "ॐ क्रीं काल्यै नमः" का 108 बार जप।

• अन्त में आरती।

विशेष दिन: अमावस्या, कालाष्टमी, दीपावली। उस रात विशेष "नैमित्तिक पूजा" — 1008 बार जप, खीर का भोग, दीप-दान।

· · ·

वास्तु पुरुष मण्डल और काली यन्त्र — एक तुलना

वास्तु मण्डल ब्रह्म 81 पद काली यन्त्र क्रीं 15 कोण दोनों — एक केन्द्र, चार दिशा, और देवी का स्थान
वास्तु = ज़मीन का यन्त्र; काली यन्त्र = चेतना का वास्तु

देखिए कैसे दोनों समानांतर हैं। वास्तु पुरुष मण्डल भी एक "यन्त्र" है — पर भूमि का। काली यन्त्र चेतना का "वास्तु" है — पर मन का।

दोनों में चार दिशाएँ हैं। दोनों में एक केन्द्र है। दोनों में देवता-स्थापना है। एक भूमि-शक्ति को बाँधता है। दूसरा चेतना-शक्ति को।

यदि आप अपने घर के ब्रह्म-स्थान पर एक छोटा काली यन्त्र स्थापित करें — आप दो यन्त्रों को एक साथ जोड़ते हैं। बाहर का वास्तु यन्त्र, भीतर का काली यन्त्र। यह "महायन्त्र" है — दोनों की शक्ति एक साथ।

॥ ॐ श्री काली यन्त्राय नमः ॥

— अध्याय चार समाप्त —

अगले अध्याय में — मन्त्र साधना का विज्ञान और बीज मन्त्रों का गुप्त अर्थ।

अंतिम प्रोफेशनल चेकलिस्ट

वास्तु प्लान या guidance page की समीक्षा करते समय हर बिंदु टिक करें ताकि मुख्य सत्यापन छूटे नहीं।

0/5 पूर्ण2 मिनट self-audit
Checklist PDF डाउनलोड करेंVastu Consultation बुक करें

क्या आपको व्यक्तिगत Vastu सलाह चाहिए?

राणा सिकंदर सिंह जी से सीधी सलाह — 10+ वर्षों का अनुभव, प्रामाणिक 45-देवता पद्धति।

राणा सिकंदर सिंह

वास्तु गुरुजी राणा सिकंदर सिंह के मार्गदर्शन में • VastuGuruji संस्थापक • 10+ वर्षों का अनुभव • रायपुर, छत्तीसगढ़ • विशेषज्ञता: 45 देवता वास्तु + ज्योतिष • रायपुर में वास्तु सलाहकार

Recommended products

Curated for you.

Comments & Ratings

0 comments
No comments yet. Be the first to share your experience.
🪔 Next festival: करवा चौथ · 08 Nov 2026 · 5 दिन शेष View Tips →