स्पन्दन

स्पन्दन अध्याय 20 — वास्तु में नक्षत्रों की भूमिका

~6 मिनट पढ़ें
VastuGuruji Team 21 Jun 2026

स्पन्दन अध्याय 20 — वास्तु में नक्षत्रों की भूमिका

अध्याय बीस

27 नक्षत्र · गृह-योग · आय-व्यय · निर्माण-मुहूर्त

30-दिन प्रोटोकॉल PDF - फ्री डाउनलोड

अपना ईमेल दर्ज करें और गाइडेड टेम्पलेट तुरंत प्राप्त करें।

27 तारा-स्थान चक्र — 13°20′ प्रति नक्षत्र अश्विनी भरणी कृत्तिका रोहिणी मृगशिरा आर्द्रा पुनर्वसु पुष्य आश्लेषा मघा पूर्व-फा. 27 चन्द्र-स्थान
हर नक्षत्र — एक देव, एक स्वामी, एक शुभ-काम

❖ ❖ ❖

"वास्तु केवल स्थान का शास्त्र नहीं — यह काल का भी शास्त्र है। सही स्थान + सही समय = परिपूर्ण निर्माण।"

वैदिक ज्योतिष में आकाश को 27 बराबर भागों में बाँटा गया है — हर भाग एक तारा-स्थान। चन्द्रमा हर भाग में लगभग एक दिन ठहरता है — 27 नक्षत्र = 27 दिन का चन्द्र-मास। वास्तु शास्त्र इन्हीं नक्षत्रों का उपयोग — गृह-निर्माण के मुहूर्त, घर के स्वामी का योग, और आय-व्यय की गणना के लिए।

· · ·

27 नक्षत्र — संक्षिप्त परिचय

हर चन्द्र-स्थान की चौड़ाई — 13°20' (आकाश का 360° / 27)। हर नक्षत्र का —

देवता — जो उसका अधिष्ठाता
स्वामी ग्रह — नवग्रहों में से एक
गण — देव, मनुष्य, या राक्षस
नाडी — आदि, मध्य, या अन्त्य
योनि — 14 पशुओं में से एक
विशिष्ट कर्म — कौन सा काम शुभ

उदाहरण — अश्विनी —
देव — अश्विनी कुमार
स्वामी — केतु
गण — देव
नाडी — आदि
योनि — अश्व
शुभ-कर्म — यात्रा, औषधि, गृह-प्रारम्भ

· · ·

गृह-निर्माण के शुभ नक्षत्र

शास्त्रों के अनुसार 27 में से 14 तारा-स्थान गृह-निर्माण के लिए शुभ —

परम-शुभ (6) —
रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य, उत्तर-फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा-भाद्रपद

शुभ (8) —
अश्विनी, पुनर्वसु, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा

अशुभ (13) — गृह-निर्माण से बचें —
भरणी, कृत्तिका, आर्द्रा, आश्लेषा, मघा, पूर्व-फाल्गुनी, विशाखा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, शतभिषा, पूर्वा-भाद्रपद, रेवती

परम-शुभ नक्षत्रों में किया गया प्रारम्भ — विशेष फलदायी। पंडित जी से नक्षत्र-पञ्चांग देखकर मुहूर्त निकलवाएँ।

· · ·

वास्तु के पाँच चरण

गृह-निर्माण के पाँच मुख्य चरण — हर एक के लिए विशिष्ट चन्द्र-स्थान-मुहूर्त —

1. भूमि-पूजन — रोहिणी, उत्तरा-फा., उत्तराषाढ़ा
2. खुदाई — हस्त, चित्रा, स्वाती
3. नींव-शिला — रोहिणी, पुष्य, उत्तरा-भाद्रपद
4. द्वार-स्थापना — अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा
5. गृह-प्रवेश — रोहिणी, पुष्य, उत्तरा-फा., उत्तराषाढ़ा

गृह-प्रवेश — सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्त। पुष्य नक्षत्र को "तारा-स्थान-राज" कहा गया — कोई भी कार्य पुष्य में आरम्भ हो — विशेष पुण्य।

· · ·

घर के स्वामी का नक्षत्र-योग

गृह-निर्माण से पहले — घर के स्वामी का नक्षत्र देखा जाता है। उसके चन्द्र-स्थान और नए घर की दिशा के बीच योग बनना चाहिए।

तीन प्रकार के योग —

स्व-योग — स्वामी का नक्षत्र + समान-स्वामी ग्रह दिशा
उदा. रोहिणी (चन्द्र-स्वामी) + NW (वायु-दिशा) → शुभ

मित्र-योग — स्वामी का तारा-स्थान + मित्र-ग्रह की दिशा
उदा. पुष्य (शनि-स्वामी) + W (वरुण) → शुभ

शत्रु-योग — स्वामी का नक्षत्र + शत्रु-ग्रह की दिशा
उदा. अश्लेषा (बुध-स्वामी) + S (मंगल) → अशुभ — उपाय आवश्यक

शत्रु-योग में निर्माण — विशेष पूजा, शान्ति-मन्त्र, और नवग्रह-यन्त्र स्थापित करें।

· · ·

आय-व्यय गणना

शास्त्रों के अनुसार — हर घर का आय और व्यय चन्द्र-स्थान-गणना से निकाला जाता है। यह "आयादि-षड्वर्ग" कहलाती है — छह भागों का चक्र।

आयादि के 6 तत्त्व —
1. आय — आमदनी
2. व्यय — खर्च
3. तिथि — मासिक तिथि
4. वार — सप्ताह का दिन
5. योनि — पशु-योनि (14 में से)
6. अंश — दिशा-अंश

गणना सूत्र —

आय = (लम्बाई × चौड़ाई × 8) / 12
व्यय = (लम्बाई × चौड़ाई × 9) / 10

शेषफल का अर्थ — आय 1-12 तक के नक्षत्र-योग, व्यय 1-10 तक के दोष-संख्या। आय > व्यय — शुभ। आय = व्यय — सामान्य। आय < व्यय — हानि।

· · ·

गण और योनि-मिलान

परिवार के सभी सदस्यों के तारा-स्थान — और घर के नक्षत्र के बीच गण-मिलान देखा जाता है।

देव-गण (9 चन्द्र-स्थान) — अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, स्वाती, अनुराधा, श्रवण, रेवती
मनुष्य-गण (9 नक्षत्र) — भरणी, रोहिणी, आर्द्रा, पूर्व-फा., उत्तर-फा., पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, पूर्वा-भाद्र., उत्तरा-भाद्र.
राक्षस-गण (9 तारा-स्थान) — कृत्तिका, अश्लेषा, मघा, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, मूल, धनिष्ठा, शतभिषा

घर देव-गण नक्षत्र में बना — सभी देव-गण और मनुष्य-गण व्यक्तियों के लिए शुभ। राक्षस-गण के लिए — मध्यम। राक्षस-गण घर — विपरीत।

14 योनियाँ — हर चन्द्र-स्थान की एक पशु-योनि। योनियाँ मित्र, शत्रु, उदासीन होती हैं। घर-स्वामी और घर की योनि शत्रु न हो — मूल नियम।

· · ·

चतुर्थ भाव — घर का स्थान

वैदिक ज्योतिष में चतुर्थ भाव (4th house) — घर, माता, सुख, वाहन, और भूमि का स्थान। चन्द्रमा से चतुर्थ देखा जाता है।

घर खरीदते समय — स्वामी के चतुर्थ भाव का अध्ययन। यदि चतुर्थ में शुभ ग्रह (गुरु, शुक्र, बुध) — गृह-योग बलवान। यदि अशुभ (मंगल, शनि, राहु-केतु) — सावधानी।

चतुर्थ-दशा (चतुर्थ का स्वामी ग्रह की महादशा) में नया घर — आदर्श। केतु-दशा या राहु-दशा में नया निर्माण — विवेकपूर्ण नहीं।

· · ·

वर्ष-कुण्डली और गृह-प्रवेश

गृह-प्रवेश के समय — व्यक्ति की वर्ष-कुण्डली (annual horoscope) देखी जाती है। यदि वर्ष-कुण्डली में लग्न और चतुर्थ शुभ — गृह-प्रवेश का परिणाम बहु-वर्ष लाभदायी।

गृह-प्रवेश के लिए वर्ज्य दिन —

शनिवार (शनि का दिन)
मंगलवार (मंगल का दिन)
अमावस्या
पूर्णिमा (विशेष परिस्थिति को छोड़कर)
संक्रान्ति-दिन
राहु-काल, यम-गण्ड, गुलिक-काल समय

शुभ दिन — सोमवार, गुरुवार, शुक्रवार। शुभ समय — सूर्योदय के बाद 9 बजे तक

· · ·

व्यावहारिक सुझाव

आज के युग में हर निर्णय नक्षत्र-गणना से लेना सम्भव नहीं। पर कुछ सरल नियम मानें —

1. भूमि-पूजन और नींव — पंडित से शुभ मुहूर्त लें। 1-2 दिन की प्रतीक्षा के बाद का शुभ तारा-स्थान चुनें।

2. गृह-प्रवेश — स्वामी की वर्ष-कुण्डली देखकर मुहूर्त। राहु-काल और अमावस्या/पूर्णिमा से बचें।

3. अग्रिम राशि देने से पहले — स्वामी का चन्द्र-नक्षत्र और घर का दिशा-योग जाँचें।

4. छोटे शुभ-कार्य — कलश-स्थापना, द्वार-निर्माण, आदि — पुष्य चन्द्र-स्थान में आरम्भ करें।

· · ·

"नक्षत्र — आकाश के 27 पुष्प। हर एक का अपना सुगन्ध, अपना समय, अपना फल। सही पुष्प की प्रतीक्षा करना — विवेक है।"

॥ इति शुभम् ॥

अगले अध्याय में — वैदिक वास्तु साहित्य। 200+ ग्रन्थों का विहंगम दर्शन। यह श्रृंखला का अन्तिम अध्याय।

अंतिम प्रोफेशनल चेकलिस्ट

वास्तु प्लान या guidance page की समीक्षा करते समय हर बिंदु टिक करें ताकि मुख्य सत्यापन छूटे नहीं।

0/5 पूर्ण2 मिनट self-audit
Checklist PDF डाउनलोड करेंVastu Consultation बुक करें

क्या आपको व्यक्तिगत Vastu सलाह चाहिए?

राणा सिकंदर सिंह जी से सीधी सलाह — 10+ वर्षों का अनुभव, प्रामाणिक 45-देवता पद्धति।

VastuGuruji Team

VastuGuruji • 10+ वर्षों का अनुभव • रायपुर, छत्तीसगढ़ • विशेषज्ञता: वास्तु + ज्योतिष। About

Recommended products

Curated for you.

Comments & Ratings

0 comments
No comments yet. Be the first to share your experience.
🪔 Next festival: गुरु पूर्णिमा · 29 Jul 2026 · 37 दिन शेष View Tips →