विश्वकर्म प्रकाश अध्याय 4 — गृहादि निर्माण, शय्या मान, शयन दिशा | VastuGuruji
विश्वकर्म प्रकाश का चौथा अध्याय गृहादिनिर्माणाध्यायः कहलाता है। यह बहुत ही व्यावहारिक अध्याय है — कौन-सा grade का गृह किसके लिए, शय्या/आसन के exact dimensions राजा-राजकुमार-मन्त्री-सेनापति-पुरोहित के लिए, सोने की दिशा के नियम (कभी उत्तर में सिर नहीं), और शिल्पमान (अंगुल-हस्त-दण्ड-नल्व-योजन) measurement system। साथ में एक गहरी दार्शनिक बात — शरीर भी गृह है, शय्या भी गृह है, भवन भी गृह है।
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🏛 गृह के उत्तमादि भेद — Three Grades of Buildings
चतुर्दश विधा: प्रोक्ता गृहाश्रोत्तममध्यमा:।
निन्दिताश्र प्रमाणाद्द कथयामि समासत:॥ १॥
गृहं तद् द्विविधं प्रोक्तं शरीरन्तु पृथिग्विधम्।
शरीरं तु गृह्ध्राम शय्याशयनचक्रके॥ २॥
अर्थ: गृह 3 grades में बँटे हैं — उत्तम, मध्यम, निन्दित, कुल 14 sub-types। और एक critical दार्शनिक बात — शरीर और शय्या भी गृह कहलाते हैं। तीनों concentric houses हैं एक ही आत्मा के लिए।
विमर्श — Body-house equation
"जिस प्रकार आत्मा का निवास शरीर में है, उसी प्रकार व्यक्ति का निवास गृह में है। अत: गृह वास्तव में मनुष्य की काया या व्यक्तित्व का outer शरीर ही होता है।"
Hinglish: Yeh poore chapter ka deepest insight hai. Vastu real-estate ke baare me nahi hai — yeh body ke outer shell ke baare me hai. Isiliye ghar ke proportions body ke proportions ko reflect karte hain, aur bed ke proportions body aur ghar dono ko reflect karte hain. Sab kuch human form ke around harmonised hai. Modern "embodied space" psychology jise 21st century me discover kar rahi hai, woh Vishwakarma Prakash 2000+ saal pehle formalise kar chuka tha.
🛏 सामान्य शय्या (bed) का मान
शय्यामानं स्वदेहेन सुखं कार्यं सुखेप्सुना।
एकाशीत्यङ्गुला शय्या नवत्यङ्गुलसम्मिता॥ ३॥
अर्थ: "सुख चाहने वाले को अपनी शय्या अपने शरीर की लम्बाई के अनुसार बनानी चाहिए। मानक शुभ लम्बाई — 81 अंगुल (~5 फुट) या 90 अंगुल (~5.5 फुट)।"
विमर्श: हर व्यक्ति को अपनी शय्या अपनी शरीर-लम्बाई के अनुसार बनवानी चाहिए। 1 अंगुल ≈ 0.75 inch (मनुष्य की उँगली की चौड़ाई)।
- 81 अंगुल = 60.75 inches ≈ 5 ft 1 inch
- 90 अंगुल = 67.5 inches ≈ 5 ft 7 inches
शय्या की चौड़ाई — Width
तदर्धेन च विस्तीर्णा पादुकाव्युदताडुलौ।
आसनं तु प्रकर्तव्यां शय्याविस्तारमानकम्॥ ४॥
चौड़ाई = लम्बाई का आधा।
- 81 × 41 अंगुल ≈ 60 × 30.5 inches
- 90 × 45 अंगुल ≈ 67 × 33.5 inches
यह 2:1 अनुपात है। Modern queen bed (60×80 inches) close है — but classical अनुपात exact 2:1 था।
पादुका (पाये) की ऊँचाई
शय्या की पाये ऊँचाई = चौड़ाई / 4। 45 अंगुल चौड़ी शय्या → पाये ~ 11 अंगुल (~ 8 inches)। यह height ground से body को साथ-साथ ठण्डी हवा, कीड़े-मकोड़े, चूहों से बचाती है।
👑 राजा-मन्त्री-सेनापति-पुरोहित की शय्या
अथवा ह्यपरा प्रोक्ता नृपाणां कामिमिच्छताम्।
शताङ्गुला तु नृपाणां तु महती परिकीर्तिता॥ ७॥
| व्यक्ति | शय्या लम्बाई | Modern |
|---|---|---|
| राजा | 100 अंगुल | ~ 75 inch / 6 ft 3 in |
| राजकुमार | 90 अंगुल | ~ 67 inch / 5 ft 7 in |
| मन्त्री | 84 अंगुल | ~ 63 inch / 5 ft 3 in |
| सेनापति | 78 अंगुल | ~ 58.5 inch / 4 ft 11 in |
| पुरोहित | 72 अंगुल | ~ 54 inch / 4 ft 6 in |
| सामान्य गृहस्थ | 81 अंगुल | ~ 60 inch / 5 ft |
| देव-शय्या (मूर्ति) | 81 अंगुल | same |
Hinglish: Yeh hierarchical hai but deep logic ke saath. Raja ki shayya sabse badi (100) kyunki uska territory sabse bada. Purohit ki sabse choti kyunki woh अपरिग्रह cultivate karta hai. Sabse interesting: गृहस्थ aur देव-शय्या dono 81 अंगुल — yani householder ko deity ke equal status mila hai is scheme me, kyunki household sustains the world.
⚖️ शय्या हीनाधिक का फल
हीना रोगप्रदा दीर्घा दुःखदा सुखदा समा।
- शय्या छोटी → रोग
- शय्या बड़ी → दुःख
- शय्या शरीर के बराबर → सुख
Hinglish: Modern sleep science yeh confirm karti hai — short bed → cramped legs + chronic back pain; oversized bed → energy disconnect + cold loss. Body-sized bed best. Goldilocks principle.
🧭 शयन-दिशा के नियम — Sleep Direction
सौम्यं प्रत्यक्षिरो मृत्युर्शाहारुक्स्तुतार्तिदा।
प्राक्किरा शयने विद्याद् दक्षिणे सुखसम्पदा॥ ५२॥
पश्चिमे प्रबलां चिन्ता हानिं मृत्युं तथोत्तरे।
स्वगेहे प्राक्किरा: सुप्याच्छ्वशुरे दक्षिणे शिरा:॥ ५३॥
प्रत्यक्षिरा: प्रवासे तु नोदक्सुप्यात्कदाचन।
यदि सुप्यात्तदा रोगो शोको उपघ्यते चिरात्॥ ५४॥
| दिशा में सिर | फल | कब? |
|---|---|---|
| उत्तर | मृत्यु, रोग, पुत्र-कष्ट | STRICTLY कभी नहीं |
| पूर्व | सुख, सम्पत्ति, ज्ञान | अपने घर में best |
| दक्षिण | सुख, गहरी नींद | excellent — ससुराल में compulsory |
| पश्चिम | मानसिक चिन्ता | केवल प्रवास (यात्रा) में |
Critical rule: "उत्तर में सिर तथा दक्षिण में पैर करके तो कभी भी, कहीं भी नहीं सोना चाहिए।" यदि कोई ऐसा करता है तो चिर-कालीन रोग और शोक होते हैं।
Hinglish: Iska scientific basis hai — Earth ka magnetic field North-to-South flow karta hai. Head-North karke sona body ke polar alignment ko Earth ke against rakhta hai. Modern bio-magnetic research isko confirm karti hai — head-North sleep me insomnia, headaches, REM disturbance badhte hain. Vishwakarma Prakash 2000+ saal pehle yeh bata raha tha.
Quick reference
- अपने घर: सिर पूर्व या दक्षिण
- ससुराल: सिर दक्षिण
- यात्रा/होटल: सिर पश्चिम (या पूर्व)
- कभी नहीं: सिर उत्तर
🪵 शय्या के लिए शुभ काठ
| लकड़ी | फल |
|---|---|
| असन (विजयसार) | रोग-नाशक |
| चन्दन | शत्रुनाशक, धर्म-आयु-यश दायक |
| शीशम | आर्थिक समृद्धि |
| पद्मक (पद्माख) | दीर्घायु, लक्ष्मी, पुत्र-सुख |
| शाल/शाक (सागौन) | सामान्य कल्याण |
| देवदारु | शुभ |
| श्रीपर्णी | शुभ |
निषिद्ध:
- बिजली गिरी हुई लकड़ी
- पानी में बही लकड़ी
- आँधी से गिरी लकड़ी
- हाथी से तोड़ी लकड़ी
- मधुमक्खी के छत्ते वाली लकड़ी
- श्मशान, मन्दिर, सड़क, नदी-संगम के पास के वृक्ष
- काँटेदार वृक्ष (बबूल, खैर)
- पक्षियों के घोंसले वाले वृक्ष
- देवालय के वृक्ष
- गाँव के दक्षिण/पश्चिम के वृक्ष
Hinglish: Logic — wood absorbs the subtle vibration of its environment over decades. Cremation-ground tree absorbs death-energy. Bee-hive tree absorbs aggression. Roadside tree absorbs traveler-anxiety. Phir us lakdi ki bed banane par aap literally un absorbed vibrations pe sote ho. Modern environmental psychology "object memory" kehti hai isko.
🧱 14 प्रकार के गृह — Building Materials
| # | नाम | निर्माण-सामग्री | उपयोग |
|---|---|---|---|
| 1 | मन्दिर | पाषाण (पत्थर) | मन्दिर, देव-स्थापना |
| 2 | भवन | पक्की ईंट | आम residential — best |
| 3 | सुमन | कच्ची ईंट | ग्रामीण residential |
| 4 | सुधार | मिट्टी और चूना | Eco-residential |
| 5 | मानस्य | काष्ठ (लकड़ी) | पहाड़ी ठण्डे क्षेत्र |
| 6 | चन्दन | चन्दन काष्ठ | केवल राज-मण्डप |
| 7 | विजय | वेत्र-frame | अस्थायी संरचना |
| 8 | कालिम | तृण (घास-फूस) | आश्रम, retreat कुटिया |
| 9 | कर | सुवर्ण-पत्र | सान्तक्तुम के भीतरी कक्ष |
| 10 | श्रीभव | रजत | मन्दिर द्वार |
| 11 | सूर्यमन्त्र | ताम्र | यन्त्र-कक्ष |
| 12 | चण्ड | लोहा | रक्षा-संरचना |
| 13 | अनल | लाख | दुर्लभ alankaric |
| 14 | प्रायुव | जल-निरोधक | जल-कक्ष, दुर्लभ |
पहले 4 (मन्दिर/भवन/सुमन/सुधार) ही असली residential हैं — ब्राह्मण/क्षत्रिय/वैश्य/शूद्र corresponding। बाक़ी speciality हैं।
⏰ काल-शुद्धि की अपेक्षा — कब Strict Muhurat चाहिए
शुभदा ब्राह्मणादीनां सर्वेषामपि शोभना:।
उत्तमा शुद्धकालेषु स्थाप्या: शुद्धविधानत:॥ २१॥
काष्ठादिकृतगेहेषु कालापेक्षां न कारयेत्।
तृणादारुगृहारम्भे विकल्पं नैव कारयेत्॥ २२॥
सौवर्णादिगृहारम्भे मासदोषो न विद्यते।
- उत्तम गृह (पत्थर, पक्की ईंट) → Chapter 3 का पूरा 14-दोष मुहूर्त compulsory
- घास-फूस / लकड़ी कुटिया → मुहूर्त की अपेक्षा नहीं — कभी भी बना सकते हैं
- सुवर्ण/रजत/ताम्र/लोहा कक्ष → मासदोष नहीं। महीने का दोष apply नहीं होता — कोई भी शुभ तिथि-वार-नक्षत्र चुन लो।
Hinglish: Yeh exemption rule modern Vastu me misunderstood hai. Metal-cell construction (yantra rooms, sanctum sanctorum) ko month check nahi chahiye kyunki metal khud energy work karta hai. Permanent stone/brick ko full muhurat chahiye kyunki centuries tak energy hold karna hai.
🚪 गृह-प्रवेश का संक्षिप्त विचार
- अपूर्व-संज्ञक — पहली बार नये घर में प्रवेश
- सपूर्व-संज्ञक — यात्रा के बाद अपने ही घर में लौटना
- द्वन्द्व-संज्ञक — पुराने renovated घर में पुन: प्रवेश
तीनों के लिए अलग-अलग मुहूर्त और मन्त्र। पूरा विवरण Chapter 10 में।
📐 शिल्पमान — Measurement System
| इकाई | बराबर | Modern |
|---|---|---|
| 1 यव | 1 जौ की चौड़ाई | ~ 0.094 inch |
| 1 अंगुल | 8 यव | ~ 0.75 inch |
| 1 हस्त | 24 अंगुल | ~ 18 inch / 1.5 ft |
| 1 दण्ड | 4 हस्त | ~ 6 ft |
| 1 नल्व | 100 हस्त (per कोश) या 400 हस्त (per अमरकोश) | ~ 150 ft या ~ 600 ft |
| 1 योजन | 4 कोश | ~ 8 miles |
तीन प्रकार के हस्त:
- प्राकृत हस्त — अपने हाथ की लम्बाई, व्यक्तिगत फर्नीचर के लिए
- कौषिक हस्त — मानक 24 अंगुल, general construction के लिए
- उत्तम हस्त — 28-30 अंगुल, राजकीय भवनों के लिए
Hinglish: Yeh body-relative system genius hai. Aapka ghar aapke shareer ke proportions ke around banta hai. Modern standardised metric ne yeh personal proportionality khatam kar di — sab 8-foot ceiling, 32-inch doors, kisi ki body proportion consideration nahi.
📌 Chapter 4 — व्यावहारिक चेकलिस्ट
- शय्या अपने शरीर के अनुसार — minimum 81 अंगुल
- चौड़ाई = लम्बाई/2, पाये की ऊँचाई = चौड़ाई/4
- शुभ काठ: असन, चन्दन, शीशम, पद्माख, साल, सागौन। निषिद्ध: तेन्दुआ, बबूल, सड़क/श्मशान/मन्दिर के पास के वृक्ष
- उत्तर में सिर कभी नहीं। अपने घर पूर्व/दक्षिण, ससुराल दक्षिण, यात्रा पश्चिम
- पत्थर/पक्की ईंट के लिए Chapter 3 का full 14-दोष मुहूर्त
- घास/लकड़ी की कुटिया के लिए मुहूर्त skip
- धातु-कक्ष के लिए केवल तिथि-वार-नक्षत्र, मास-दोष नहीं
- अंगुल-हस्त-दण्ड measurement use करें
- Residential के लिए "भवन" (पक्की ईंट / modern RCC)
- दर्शनिक सूत्र याद रखें — शरीर → शय्या → भवन। तीनों concentric houses।
🌿 Chapter 5 की झलक
पाँचवाँ अध्याय शिलान्यासाध्यायः — famous Foundation Stone chapter। 81-pad वास्तु मण्डल का operational use, 5 शिला (नन्दा, भद्रा, जया, रिक्ता, पूर्णा) और उनकी placement, आधार-शिला, बलि (offering) procedures, और "स्वर्ण-शिला" deposit का ritual — सब अगले post में।
📞 शय्या / निद्रा / भवन परामर्श
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- YouTube subscribe — अगले हफ्ते Chapter 5 video
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अंतिम प्रोफेशनल चेकलिस्ट
वास्तु प्लान या guidance page की समीक्षा करते समय हर बिंदु टिक करें ताकि मुख्य सत्यापन छूटे नहीं।
Common mistakes to avoid
- प्रवेश, zone और room logic verify किए बिना सीधे remedy पर जाना।
- Informational guidance को heavy sales intent के साथ mix करना।
- Measurable guidance की जगह fear-heavy language उपयोग करना।









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