Vishwakarma Prakash

विश्वकर्म प्रकाश अध्याय 3 — मुहूर्त, 14 दोष, 1000-वर्ष आयु योग | VastuGuruji

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VastuGuruji Team 18 Jun 2026

विश्वकर्म प्रकाश अध्याय 3 — मुहूर्त, 14 दोष, 1000-वर्ष आयु योग | VastuGuruji

विश्वकर्म प्रकाश का तीसरा अध्याय गृहवास्तुकालनिर्णयाध्यायः कहलाता है। पहले दो अध्यायों ने भूमि-परीक्षा और गृह-निर्माण की मूलभूत बातें बतायीं — अब बात आती है मुहूर्त की। निर्माण किस मास, तिथि, वार, नक्षत्र में आरम्भ करना चाहिए? कौन-से 14 दोष टालने हैं? कौन-से योग 80, 100, 200, यहाँ तक कि 1000 वर्ष तक भवन की आयु बढ़ाते हैं?

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यह अध्याय पूरी तरह व्यावहारिक है — कोई भी ज्योतिषी या वास्तु-आचार्य इसी का प्रयोग करता है जब आपको शिलान्यास या गृह-प्रवेश का मुहूर्त देता है।

🌟 मुहूर्त की महत्ता — Opening Shloka

अथात: सम्प्रवक्ष्यामि गृहे कालविनिर्णयम्।
यथाक्रमेण देवादिमर्त्यपर्यन्तसम्मतम्॥ १॥

अर्थ: "अब मैं देवताओं से लेकर मनुष्यों तक — सबके लिए गृह-निर्माण के काल का निर्णय क्रमशः बताऊँगा।"

विमर्श: सबसे पहले एक गहरी बात — मुहूर्त सिर्फ मनुष्यों के लिए नहीं है, देवताओं के मन्दिर के लिए भी है। काल-निर्णय universal है। यह आपकी आर्थिक स्थिति, धर्म, जाति पर निर्भर नहीं करता — सिर्फ ब्रह्माण्ड के समय-चक्र पर।

🌙 10 शुभ नक्षत्र — Auspicious Lunar Mansions

मृदुध्रुवस्वातिपुष्यधनिष्ठाद्वितये रवो।
शीतांशो भूमिखातादौ शस्ता: सर्वार्थसिद्धिदा:॥ २॥

अर्थ: भूमि-खनन (शिलान्यास) के लिए ये 10 नक्षत्र शुभ कहे गये हैं —

क्रमनक्षत्रवर्ग
1मृदु — मृगशिरामृदु
2चित्रामृदु
3रेवतीमृदु
4अनुराधामृदु
5उत्तराफाल्गुनीध्रुव
6उत्तराषाढ़ाध्रुव
7उत्तराभाद्रपदध्रुव
8रोहिणीध्रुव
9स्वातिचर
10पुष्यलघु
11धनिष्ठा (1st half)चर

विमर्श: इनमें उत्तराषाढ़ा, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराभाद्रपद, रोहिणी — ये "ध्रुव" नक्षत्र हैं, यानी जो काम इनमें शुरू हो वह स्थिर (ध्रुव) रहता है। इमारत बनवाने के लिए सबसे शक्तिशाली नक्षत्र हैं।

Hinglish: Yeh nakshatra list practical hai — koi bhi pandit muhurat dega to inhi me se chunega. Modern panchang me check kar lo, apply kar lo. 27 me se 10-11 shubh hain — yani 40% saal aap construction start kar sakte ho.

📅 शुभ तिथि — Auspicious Days of Lunar Fortnight

द्वितीयापञ्चमीनन्दादशम्येकादशी तिथि:।
त्रयोदशी द्वितीया च तृतीया च शुभा: स्मृता:॥ ३-४॥

शुभ तिथियाँ: 2, 3, 5, 10, 11, 13

अशुभ तिथियाँ (शलोक 5): 1, 4, 6, 8, 9, 14, अमावस्या, पूर्णिमा

विमर्श: रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) हमेशा वर्जित। चतुर्दशी और अमावस्या तो बिल्कुल भी नहीं — यह काला समय है। द्वितीया, तृतीया, पञ्चमी सबसे शुभ। बहुत-सी पारिवारिक पूजाएँ अभी भी इसी कैलेण्डर पर चलती हैं।

📅 शुभ वार — Auspicious Days of Week

वारशुभता
सोमवारउत्तम — चन्द्रमा
बुधवारउत्तम — बुद्धि
गुरुवारसर्वोत्तम — बृहस्पति
शुक्रवारउत्तम — शुक्र
रविवारमध्यम — सूर्य
मङ्गलवारअशुभ — मङ्गल
शनिवारअशुभ — शनि

Hinglish: Mangal aur Shani ke din kabhi shilanyas ya griha pravesh nahi. Guruvar best — Brihaspati ki kripa se imarat lambi chalti hai.

🔥 धनिष्ठा पञ्चक — The Five Forbidden Nakshatras

धनिष्ठापञ्चकं नाम धनिष्ठादिक्षत्रके।
गृहाद्यारम्भनं त्याज्यमन्यथा शोकहेतवे॥ ६॥

अर्थ: धनिष्ठा से शुरू होकर अगले 5 नक्षत्र — धनिष्ठा (2nd half), शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती — को "पञ्चक" कहते हैं। इस अवधि में गृह-निर्माण का आरम्भ नहीं करना चाहिए, अन्यथा शोक का कारण बनता है।

Hinglish: Yahi "पञ्चक" hai jiska sab dadi-nani zikr karti hain. Saal me kai baar aata hai (har 27 din ke chakra me 5 din). Iss me building start mat karo. (Note: Uttarabhadrapada normally shubh hai, but jab pancchak ke andar aata hai to nahi.)

⚠️ 14 दोष (14 Forbidden Yogas) — Critical to Avoid

तीसरे अध्याय का सबसे महत्वपूर्ण भाग — ये 14 दोष कोई भी मुहूर्त निकालते समय जरूर check करने पड़ते हैं।

#दोष का नामक्या है
1यमित्रचन्द्र-सूर्य से कुछ निश्चित दूरी पर
2वेधनक्षत्र-नक्षत्र के बीच कुयोग
3उपग्रहराहु/केतु जैसे छाया-ग्रह की दूषित युति
4कर्तरीशुभ ग्रह दोनों तरफ अशुभ से घिरा
5एकार्गलनक्षत्र-तिथि का गलत संयोग
6लताचन्द्रमा का विशेष अंशों पर होना
7चण्डायुधआक्रामक नक्षत्र-योग
8क्रान्तिपातक्रान्ति-पात पर ग्रहों का होना
9व्यतीपात27 योगों में से एक — अति-अशुभ
10वैधृति27 योगों में एक — पूरा त्याज्य
11कुलिकतिथि के विशेष अंश
12कण्टकनक्षत्र-अंश का कण्टकीय बिन्दु
13यमघण्ट"मृत्यु-घण्टी" योग
14कालवेलाप्रत्येक वार का राहुकाल जैसा निश्चित अशुभ काल

Hinglish: Yeh 14 dosh wahi cheez hain jise modern panchang me "varjit kaal" ya "rahukaal-yamghantkaal-gulikaal" ke roop me dikhaya jata hai. Aaj ke pandit har muhurat me yeh 14 check karte hain. Agar koi 5 se zyada dosh ho rahe hain — woh muhurat reject ho jata hai.

🐂 वृषभ चक्र — Vrishabha Chakra (Bull Body Wheel)

कृत्तिकामस्तके वृषभस्य रोहिणी मुखयोरुभो:।
मृगशिराग्रीवयोर्ज्ञेया आर्द्रा पादेषु संस्थिता॥ १२॥

यह एक beautiful technique है — 27 नक्षत्रों को कल्पना से वृषभ (बैल) के शरीर के अंगों पर रखा जाता है। उसी हिसाब से शुभ-अशुभ तय होते हैं।

अंगनक्षत्रफल
मस्तककृत्तिकाविघ्न
मुखरोहिणीउत्तम
ग्रीवामृगशिराशुभ
पैरआर्द्रादुःख
हृदयपुष्यश्रेष्ठ
पीठस्वातिलाभ
पूँछविशाखाविघ्न

विमर्श: सबसे अच्छा वह नक्षत्र होता है जो "हृदय" या "मुख" पर हो। पैर/पूँछ का नक्षत्र हमेशा दुःख देता है। यह smart memory technique है — पंडित को 27 नक्षत्रों के अलग-अलग फल याद रखने के बजाय बस बैल के अंग याद रहते हैं।

🏆 दीर्घायु योग — 80, 100, 200, 1000 Years

तीसरे अध्याय का सबसे चमत्कारिक हिस्सा — कौन-से शुभ संयोग में निर्माण शुरू हो तो भवन कितने साल चलता है।

वर्षयोगशर्त
80 वर्षबेसिक शुभ योग5+ दोष टाले हों
100 वर्षशुभ नक्षत्र + शुभ वारउत्तरा-त्रिक नक्षत्रों में से कोई एक
200 वर्षउत्तम नक्षत्र + शुभ ग्रह केन्द्र में + सभी दोष टलेगुरु/शुक्र केन्द्र में, सूर्य/शनि/मङ्गल नहीं
1000 वर्षसर्व-सम्मिलित परम-शुभ योगपञ्च-शुक्ल-योग — सब 14 दोष टले + गुरु लग्न में + सूर्य उच्च + चन्द्र शुक्ल पक्ष में + बृहस्पति/शुक्र साथ हों

Hinglish: 1000-year longevity yoga rare hai — saal me 1-2 baar aata hai. Stone temples (Khajuraho, Konark, Tanjore) jo 1000+ saal khade hain — un sab ke shilanyaas iss yoga me hue the. Coincidence nahi hai. Aaj ke RCC buildings 80 saal me crumble ho jaate hain — kyunki yeh muhurat consideration nahi hota.

💀 विनाश-योग — Destruction Yogas

उल्टी तरफ कुछ ऐसे योग भी हैं जिनमें निर्माण किया तो भवन का जल्दी नाश होता है:

  • व्यतीपात / वैधृति — एक साल में नष्ट
  • यमघण्ट + कालवेला combo — 5-10 साल में आग या प्राकृतिक आपदा से नष्ट
  • पञ्चक + अशुभ नक्षत्र + मङ्गल/शनि के दिन — मालिक की मृत्यु या आर्थिक बर्बादी
  • क्षय तिथि + वेध दोष — विवाद/मुकदमा, परिवार-कलह

🌌 12 भाव में ग्रह — Planetary Positions for Construction

मुहूर्त के समय कौन-सा ग्रह किस भाव में हो, उसका फल:

भावशुभ ग्रहअशुभ ग्रहफल
1 (लग्न)गुरु, शुक्र, चन्द्रसबल मूलाधार
2 (धन)शुक्रशनिआर्थिक मामले
3 (भाई)मङ्गल (good)पारिवारिक सहयोग
4 (गृह)चन्द्र, बुधराहु, केतुसबसे महत्वपूर्ण — गृह-स्थिरता
5 (सन्तान)गुरुबच्चों का सुख
6 (शत्रु)मङ्गलशनि, राहुशत्रु-जीत
7 (विवाह)शुक्रपारिवारिक सम्बन्ध
8 (आयु)शनि, राहुदीर्घायु — खाली रहे
9 (भाग्य)गुरुधर्म-कार्य सिद्धि
10 (कर्म)सूर्य, मङ्गलव्यवसाय-सफलता
11 (लाभ)शुक्र, गुरुआय वृद्धि
12 (व्यय)राहु, शनिखर्चे न बढ़ें — खाली रहे

Hinglish: 4th house (gruh-bhava) sabse important hai — yahi ghar ka representative hai. Yahan Chandra ya Budh ho to ghar shaant rahega. Rahu-Ketu ho to maslay aate rahenge. Iss liye muhurat me chauthe bhava ki shuddhi sabse pehle dekhi jati hai.

💪 ग्रह बल नियम — Planet Strength Rules

स्वोच्चस्वगेहमित्रर्क्षस्थितो ग्रहो बली भवेत्।
नीचो वा शत्रुगेहस्थो निर्बल: सर्वथा परित्याज्य:॥ ६९॥

शक्तिशाली ग्रह: अपनी उच्च राशि में, अपनी राशि में, मित्र की राशि में।

कमजोर ग्रह: नीच राशि में, शत्रु की राशि में। ऐसे मुहूर्त त्याज्य।

🌅 आधुनिक काल में मुहूर्त का महत्व

आज के युग में बहुत-से लोग सोचते हैं कि मुहूर्त एक पुरानी अंधविश्वासी प्रथा है। लेकिन जब हम विश्वकर्म प्रकाश के 14 दोषों को ध्यान से पढ़ते हैं तो समझ आता है कि यह actually solar-lunar-planetary cycles का बहुत refined observation है। हजारों वर्षों के अवलोकन के बाद हमारे ऋषियों ने यह pattern पकड़ा कि कुछ खगोलीय संयोग ऐसे होते हैं जब geomagnetic field सबसे stable होता है, सौर-विकिरण optimum होता है, और मानसिक ऊर्जा सबसे फोकस्ड होती है। उसी समय में शुरू की गयी कोई भी constructive activity — चाहे वह शिलान्यास हो, चाहे गृह-प्रवेश, चाहे नया व्यवसाय — लम्बे समय तक स्थिर और समृद्ध रहती है।

इसका सबसे बड़ा प्रमाण है हमारे प्राचीन मन्दिर। तंजावुर का बृहदीश्वर मन्दिर 1010 ई. में बना — आज भी 1015 साल बाद बिना crack खड़ा है। कोणार्क का सूर्य मन्दिर 1238 ई. का है। खजुराहो के मन्दिर 950-1050 ई. के बीच बने। इन सभी का शिलान्यास "1000 वर्ष आयु योग" में हुआ था। यह संयोग नहीं है — यह precision हजारों वर्षों के observation का परिणाम है। आज के RCC buildings, जिनका कोई मुहूर्त नहीं होता, 60-80 साल में decay होने लगते हैं।

दूसरी बात — मुहूर्त सिर्फ ज्योतिषीय calculation नहीं है। यह एक mental commitment device भी है। जब आप एक विशेष शुभ मुहूर्त चुनते हैं, उसके लिए तैयारी करते हैं, पूजा करते हैं — तो आपका subconscious mind उस project को "important and sacred" mark करता है। आप उसमें अधिक ध्यान और कर्म लगाते हैं। यह self-fulfilling prophecy है, जिसका आधुनिक psychology में भरपूर प्रमाण है। तो मुहूर्त को मानें या न मानें — इसे follow करने से कोई हानि तो नहीं होती, बल्कि लाभ ही होते हैं।

🧠 कैसे एक अच्छा पंडित मुहूर्त निकालता है

एक trained ज्योतिषी जब आपका मुहूर्त निकालता है, वह कई layers में काम करता है। पहली layer — आपकी जन्म-कुण्डली देखता है, यह जानने के लिए कि कौन-से ग्रह आपके लिए नैसर्गिक रूप से शुभ हैं। दूसरी layer — वह आगामी 30-90 दिनों के पञ्चांग को scan करता है, हर दिन के तिथि-वार-नक्षत्र-योग-करण को check करता है। तीसरी layer — Chapter 3 के 14 दोषों को हर candidate-day पर apply करता है, जो दिन 5 से ज्यादा दोषों में फँसे हैं वे eliminate हो जाते हैं। चौथी layer — बची हुई शुभ तिथियों में से वह वृषभ चक्र, राहुकाल, यमघण्टकाल, और 12 भाव में ग्रहों की स्थिति check करता है।

अन्त में जो 1-2 दिन सबसे शुद्ध निकलते हैं, उनके अन्दर भी विशेष घडी-मिनट सुझाये जाते हैं — जैसे "गुरुवार सुबह 7:42 से 9:18 बजे तक", क्योंकि उस specific time-window में लग्न और चन्द्रमा दोनों optimal positions में होते हैं। यह precision आज के atomic clock culture में भी दुर्लभ है।

📌 मुहूर्त के लिए 10-Point व्यावहारिक चेकलिस्ट

  1. नक्षत्र — 10 शुभ में से कोई एक (मृदु/ध्रुव वर्ग)
  2. तिथि — 2, 3, 5, 10, 11, 13 में से कोई एक
  3. वार — सोम, बुध, गुरु, शुक्र, रवि (मङ्गल/शनि कभी नहीं)
  4. पञ्चक नहीं — धनिष्ठा-पञ्चक से बाहर
  5. 14 दोष check — पंडित से व्यक्तिगत verify कराएँ
  6. वृषभ चक्र — नक्षत्र पीठ/हृदय पर हो, पैर/पूँछ पर नहीं
  7. लग्न शुद्ध — गुरु/शुक्र/चन्द्र लग्न में हो तो best
  8. चौथे भाव में चन्द्र/बुध, राहु/केतु नहीं
  9. आठवें और बारहवें भाव खाली रहें
  10. राहुकाल/यमघण्टकाल avoid करें

इन 10 का 80% match हो तो 80-100 साल का योग; 100% match + पंच-शुक्ल-योग तो 1000 साल का योग।

🔮 आम गृहस्थ के लिए सरल मार्गदर्शन

अगर आप एक आम गृहस्थ हैं और बड़ा कोई ज्योतिषीय analysis नहीं करवाना चाहते, तो ये कुछ simple rules हमेशा follow करें। पहला — कभी मंगलवार या शनिवार को शिलान्यास या गृह-प्रवेश न करें। दूसरा — अमावस्या, पूर्णिमा, चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी की तिथियों को टालें। तीसरा — पञ्चक के 5 दिनों में नये कार्य आरम्भ न करें (पञ्चांग में हर महीने 1-2 बार पञ्चक रहता है, साफ marked होता है)। चौथा — कोई भी नया कार्य शुरू करने के पहले राहुकाल जरूर check करें — यह हर वार के लिए fixed time-slot होता है, internet पर easily available है। पाँचवाँ — जहाँ तक हो सके गुरुवार सुबह 7 से 11 बजे का समय select करें। यह उत्तम-योग है।

यदि आप थोड़ी अधिक precision चाहते हैं, तो किसी local विद्वान पंडित से व्यक्तिगत मुहूर्त निकलवायें — उसकी fees ₹500-2000 के बीच होती है, लेकिन वह आपकी जन्म-कुण्डली देखकर specific घडी-मिनट बता देता है। और यदि आप DIY करना चाहते हैं, तो विश्वकर्म प्रकाश Chapter 3 का यह 10-point checklist same पंडित जैसी quality देगा।

🌿 Chapter 4 की झलक

चौथा अध्याय गृहादिनिर्माणाध्यायः — गृह के 14 प्रकार (Mandir/Bhavan/Suman आदि), शय्या/आसन के exact dimensions राजा-मन्त्री-सेनापति-पुरोहित के लिए, सोने की दिशा (कभी उत्तर में सिर नहीं), शय्या के लिए शुभ-अशुभ काठ, और शिल्पमान (अंगुल-हस्त-दण्ड) measurement system — सब अगले post में।

📞 मुहूर्त परामर्श

अंतिम प्रोफेशनल चेकलिस्ट

कुंडली समीक्षा करते समय हर बिंदु टिक करें ताकि मुख्य सत्यापन छूटे नहीं।

0/5 पूर्ण2 मिनट self-audit
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Common mistakes to avoid
  • प्राथमिक प्रश्न validate किए बिना सीधे remedy पर जाना।
  • Long-term patterns और short-term transit events को mix करना।
  • Measurable guidance की जगह fear-heavy language उपयोग करना।

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VastuGuruji Team

VastuGuruji • 10+ वर्षों का अनुभव • रायपुर, छत्तीसगढ़ • विशेषज्ञता: वास्तु + ज्योतिष। About

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